जिंदगी का उद्देश्य क्या है
यह सवाल बहुत ही आम है कि मैं कौन हूं, कहां से आया हूं, क्या चाहता हूं, जीवन क्या है, मरण क्या है, मुझे सुखी-दुखी करने वाला कौन है, इस जहां को किसने बनाया है? l यह सब सवाल हर एक इंसान के मन में रहता ही है चाहे वह अनपढ़ हो या पढ़ा-लिखा, गरीब या अमीर, मालिक या नौकर, प्रधानमंत्री या भिखारी l यह सवाल इसलिए है कि हम है ही श-शरीर इस बात को हम नहीं नकार सकते हैं और यहीं से अपने होने के ऊपर सारे सवाल खड़े होते रहे हैं और यह सारे सवाल के मूल में हम अपनी जिंदगी का उद्देश्य क्या है यह पता करना चाहते हैं कि आखिर मेरा उद्देश्य क्या है l तरह तरह से लोगों ने जीवन के उद्देश्य को बताने का कोशिश किया है कि आदर्शवाद ने कहा कि आत्मा को परमात्मा में विलीन करना, परमात्मा के परमधाम को जाना, भक्ति करना l भौतिकवाद बोला कि अपने शारीरिक संवेदना को पूर्ति करते रहना l इसके लिए असीम पैसा इकट्ठा करना एक काम हो जाता है क्योंकि बिना पैसे के कुछ नहीं होगा l
दोनों तरह के बाद से जिंदगी का उद्देश्य क्या है यह स्पष्ट नहीं हो पाया है प्रमाण यही है कि किसी एक व्यक्ति का आचरण ऐसा नहीं हो पाया जो सब को स्वीकार हो l आज हालत तो यह है कि किसी भी महापुरुष का नाम ले लो उसके मानने वाले भी हैं और उसकी कमियां गिनाने वाले भी हैं चाहे वह गांधी, विवेकानंद, महावीर, कबीर ,नानक, कलाम, भगत सिंह, मोदी या इंदिरा हो और कितने ही नाम क्यों न गिना लो किसी भी आदमी जात को आज तक जिंदगी का क्या उद्देश्य है यह पता नहीं चला है अगर कोई कहता है तो मैं प्रमाण मांग लूंगा और प्रमाण तो यही होगा कि वह व्यक्ति
1 अपने मन के अंदर और बाहरी द्वंद से मुक्त जीता हो
2 वह अपने परिवार में अभाव मुक्त जीता हो
3 अपने संबंधियों के साथ शिकायत और आपसी कलह से मुक्त हो
4 समाज में अभयता को स्थापित करता हो
5 प्रकृति के साथ प्रदूषण रहित जीता हो
ऊपर लिखे पांचों बिंदु किसी भी व्यक्ति के जिंदगी के उद्देश्य समझ जाने का और उसके समझदारी का प्रमाण होना चाहिए l आप लोग बताएं कि यह प्रमाण क्या आपको और सब को स्वीकार होते हैं या नहीं! अगर हां तो बात आगे बढ़ाता हूं l
देखो! आपने जैसी भी जिंदगी को समझा है उसका उद्देश्य तो यही होना चाहिए कि हमारे को जो कुछ भी दिखता है चाहे आंख से या बिना आंख के उस को समझें कि यह क्यों है यह पत्थर क्यों है, पेड़ क्यों है, यह जीव-जानवर क्यों है, यह आदमी क्यों है यह सब मिलकर मेरे जीवन को प्रभावित करते हैं और कैसे एक भी एक दूसरे से अलग अलग नहीं होते हैं l क्योंकि हम हैं ही और जिंदगी तो जीना ही पड़ेगा चाहे बिना समझे रोते गाते जियो या उसको समझ कर जियो पर जीना तो पड़ेगा ही l जो मुख्य बात सामने निकल कर आती है वह है कि यह जो दृश्य दिख रहा है सामने जिंदगी का की रोटी कपड़ा मकान गाड़ी मोटर फोन जीव जानवर और मेरे साथ में रहने वाला आदमी क्या है और क्यों है यह समझना है l तो कुल मिलाकर यह बात सामने आई कि समझना ही जिंदगी का उद्देश्य है और समझ कर जीना ही जिंदगी का कुल उद्देश्य है l क्या समझना है तो कैसे पेड़ पहाड़ नदी पानी मिट्टी जानवर मानव यह सब मिलकर मेरी जिंदगी को प्रभावित करता है और कैसे मैं इन सब के साथ शांतिपूर्ण तरीके से जी सकता हूं l
पूरी प्रकृति में कोई एक तरह की व्यवस्था है, कोई नियम काम करता है कि पानी ढलान की तरफ ही बहता है, हवा ऊपर की तरफ ही जाता है,भारी चीज हमेशा नीचे ही आती है इन सब बातें और नियमों से हम वाकिफ हैं पर जिंदगी को समझने में जब भी आदमी का जिक्र आया है हम हमेशा हारे हैं l पूरे आदमी जात ने सभी दिखाने वाली चीजों को समझ लिया है पर आदमी क्या है नहीं समझ पाया कारण यही है कि हमारी तमाम मंगलकामना के बाद भी मम्मी से पापा से भाई से बहन से गुरु से पति से पत्नी से और तमाम सगे संबंधी से शिकायत कभी खत्म ही नहीं हो रहे हैं l उम्र बढ़ने से शिकायत बढ़ा है और हम समझौता करके कि तुम अपनी जिंदगी जियो और मुझे अपनी जीने दो ऐसा करके हम चल रहे हैं l हम कितना कोशिश करते हैं कि कोई हमसे नाराज ना हो जाए मैं किसी को दुखी ना कर दूं इसी भय में तमाम रिश्ते चल रहे हैं तो आखिर कैसे कह दे कि हमको या मानव को उसकी जिंदगी का उद्देश्य पता चल गया है अगर पता चल जाता तो हर संबंध में शिकायत खत्म नहीं हो जाती क्या!
ऊपर लिखी बातों से मैं यह कहना चाहता हूं कि जिंदगी का उद्देश्य समझने में हमें अपने पास रहने वाले आदमी को भी समझना है क्योंकि पत्थर कभी आपके सिर पर आकर नहीं लगता उसको मारने वाला कोई आदमी ही होता है तो आखिर आदमी क्या चीज है और आदमी की महत्ता क्या है इस पूरे अस्तित्व में यह हम समझ ले तो जिंदगी का उद्देश्य क्या है यह भी समझ सकते हैं l समझने समझाने के अलावा आदमी के पास और कोई काम नहीं है यही जिंदगी का उद्देश्य है कि हम पदार्थ प्राण जीव और ज्ञान अवस्था की इकाइयों को समझ ले कि कैसे यह सब आपस में मिले हैं और मिले हुए हैं, जुड़े हुए हैं, पूरक हैं तो हम जिंदगी के उद्देश्य को समझ सकते हैं और सफल कर सकते हैं l
सुजीत कुमार
Jan 31st,2022
Sujit kumar

